एकान्त सम्यग् द्रष्टि में कितनी द्रष्टि पायी जाती है

Philosophy 80 views Asked 21 September, 2025

Quick Answer

एकान्त सम्यग् द्रष्टि में सामान्यतः एक ही द्रष्टि पायी जाती है, जो पूर्ण और अनुकूलित होती है। हालांकि, कुछ जैन दर्शन ग्रंथों में इस द्रष्टि की विभिन्न अवस्थाओं या भेदों का भी उल्लेख मिलता है।

Detailed Answer

जैन दर्शन में एकान्त सम्यग् द्रष्टि का अर्थ है ऐसी दृष्टि जो पूर्णतः सही और एकांगी हो, अर्थात् वह किसी भी प्रकार के मिथ्यादृष्टि या असंयत दृष्टि से रहित हो। यह दृष्टि जीव के मोक्ष की प्राप्ति के लिए आवश्यक मानी जाती है, जिसमें जीव सत्य का पूर्ण ज्ञान प्राप्त करता है। शतखंडगम जैसे प्राचीन ग्रंथों में सम्यग् दृष्टि और असंयत दृष्टि के विभिन्न प्रकारों का वर्णन है, जहां सम्यग् दृष्टि को पूर्ण और अनुकूल दृष्टि माना गया है।

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